फाल्गुन पूर्णिमा की रात होने वाला होलिका दहन हर साल की तरह 2026 में भी बुराई के दहन और नए शुभ आरंभ का प्रतीक बनेगा। होली से एक दिन पहले किया जाने वाला यह अनुष्ठान न सिर्फ पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्योतिष, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी बहुत गहरा अर्थ रखता है।
होलिका दहन 2026 की पूजा विधि क्या है?
क्या केवल लकड़ी जलाना ही होलिका दहन है? या इसके पीछे कोई खास विधि, नियम और आध्यात्मिक अर्थ भी जुड़ा हुआ है?
अगर आप भी इस साल सही तरीके से होलिका दहन करना चाहते हैं, तो यहाँ जानिए पूरी विधि, आवश्यक सामग्री और ध्यान रखने योग्य बातें।

2026 में होलिका दहन कब होगा?
पंचांगों के अनुसार 2026 में होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन शाम के प्रदोष काल में किया जाएगा। अधिकतर पंचांग और ऑनलाइन पचांग नई दिल्ली क्षेत्र के लिए लगभग यह मुहूर्त दे रहे हैं:
होलिका दहन मुहूर्त (नई दिल्ली आधार):
- 2 मार्च शाम 5:55 से 3 मार्च शाम लगभग 5:07 तक
- शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक (लगभग 2 घंटे 28 मिनट)
- इसी बीच भद्रा‑मुख और भद्रा‑पुच्छ के समय से बचते हुए दहन करना श्रेष्ठ माना गया है।
ध्यान रखें, अलग‑अलग पंचांगों में 2026 में तिथि पर थोड़ा मतभेद है (2 या 3 मार्च को दहन), लेकिन पूजा विधि सभी में लगभग एक जैसी है।
अपने शहर के स्थानीय पंचांग या मुख्य मंदिर से एक बार तिथि की पुष्टि कर लें।
होलिका दहन से पहले क्या तैयारी करें?
स्थान की तैयारी
- किसी खुले स्थान, चौराहे या मोहल्ले की निर्धारित जगह को साफ करें।
- गोबर के उपले, सूखी लकड़ियां, सूखी घास आदि से एक अग्निकुंड जैसा ढेर बनाएं।
- कई परंपराओं में बीच में एक लकड़ी/खंभा गाड़कर उसके चारों ओर गोबर से बनी गुलारी या खिलौना‑मालाएं लगाई जाती हैं।
पूजन सामग्री (समग्री सूची)
- रोली, हल्दी, चावल (अक्षत)
- कच्चा सूत / मौली (होलिका के चारों ओर लपेटने के लिए)
- फूल और माला
- गुड़, बताशे, मिठाई, नैवेद्य
- साबुत मूंग, गेहूं की बालियां या चना (नई फसल)
- साबुत नारियल, पान के पत्ते (जहां प्रथा हो)
- धूप, दीपक, अगरबत्ती
- गंगाजल मिश्रित जल का लोटा या कलश
- गोबर से बनी छोटी‑सी होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा (कई घरों/गांवों में प्रचलित)
होलिका दहन 2026 की पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
शुद्धिकरण और संकल्प
- शाम को स्नान करके स्वच्छ/परंपरागत वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल पर पहुंचकर पहले चारों ओर थोड़ा गंगाजल या स्वच्छ जल छिड़कें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें, दोनों हाथ जोड़कर भगवान श्री विष्णु, भगवान नरसिंह, भक्त प्रह्लाद और होलिका माता का ध्यान करें।
- दाहिने हाथ में जल, रोली, चावल, कुछ पुष्प और थोड़ा गुड़ लेकर संकल्प करें –
- अपने नाम, गोत्र, परिवार और वर्ष का उच्चारण करते हुए,
- “परिवार की सुख‑समृद्धि, रोग‑निवारण, पापों के नाश और कल्याण” की प्रार्थना करें।
होलिका और प्रह्लाद की स्थापना व पूजन
- यदि परंपरा हो तो गोबर से बनी होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमाएं होलिका ढेर के पास स्थापित करें।
- होलिका पर हल्का सा जल छिड़कें और दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
- रोली, चावल, हल्दी और फूल अर्पित करें।
- अब मौली (कच्चा सूत) लेकर होलिका के चारों ओर तीन, पाँच या सात बार लपेटें – यह बंधन नकारात्मक शक्तियों को बांधने और उनके दहन का प्रतीक माना जाता है।
सामग्री अर्पण और मंत्र जप
- गुड़, बताशे, साबुत मूंग, गेहूं या चने की बालियां, थोड़ा सा तिल आदि होलिका के ढेर में या सामने अर्पित करें।
- दीपक और अगरबत्ती जला कर होलिका के सामने रख दें।
- संभव हो तो “ॐ विष्णवे नमः”, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नरसिंहाय नमः”
- जैसे मंत्रों का कुछ समय जप करें; नहीं तो सीधे अपनी भाषा में प्रार्थना भी की जा सकती है।
अग्नि प्रज्वलन और परिक्रमा
- अग्नि प्रज्वलित करना
- जब शुभ मुहूर्त शुरू हो जाए (जैसे 2026 में लगभग 6:22 से 8:50 के बीच नई दिल्ली के लिए), तभी अग्नि लगाई जाए।
- प्रथानुसार सबसे पहले पुरोहित, या परिवार/समाज के सबसे वरिष्ठ व्यक्ति द्वारा होलिका में अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
- कई स्थानों पर घर से लाया हुआ दीपक या अंगारा उसी ढेर में रखकर दहन की शुरुआत की जाती है।
परिक्रमा और आहुति
- अग्नि लगने के बाद परिवार सहित होलिका की तीन, पाँच या सात परिक्रमा करें।
- परिक्रमा करते समय हर चक्कर में
- गेहूं/चना की बालियां,
- मूंग, गुड़ और बताशे अग्नि में अर्पित करें।
- मान्यता है कि इसके साथ‑साथ रोग, दुख, भय और दुर्भाग्य भी जलकर नष्ट होते हैं।
- परिक्रमा के दौरान स्त्रियां अक्सर लोकगीत गाती हैं, पुरुष भजन या कीर्तन करते हैं – यह सामूहिक भक्ति और आनंद का क्षण होता है।
दहन के बाद क्या करें? (राख, बालियां और सावधानियां)
- राख और प्रसाद
- जब अग्नि शांत हो जाए और राख ठंडी हो जाए, तो अगली सुबह थोड़ी‑सी राख को घर लाकर
- दरवाजे,आंगन या गोशाला/स्टोर के पास हल्के से छिड़का जाता है — इसे नज़र, रोग और नकारात्मकता से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
- आग में भूनी हुई गेहूं/चना की बालियां प्रसाद के रूप में खुद भी खाएं और परिवार/पड़ोस में भी बांटें।
2026 के लिए विशेष सावधानियां
2026 में भद्रा और चंद्रग्रहण जैसे योगों के कारण अलग‑अलग पंचांगों में थोड़ी तिथि‑भिन्नता है, इसलिए
अपने शहर के अनुसार स्थानीय पंचांग या किसी विश्वसनीय ऑनलाइन पचांग पर होलिका दहन का समय अवश्य चेक करें। होलिका दहन भद्रा‑मुख और ग्रहण‑सूतक के समय में न करें; साधारण भक्त के लिए आसान तरीका यही है कि नज़दीकी मंदिर/पंडित द्वारा घोषित समय का पालन करें।
बहुत देर रात या भीड़‑भाड़ में छोटे बच्चों को अग्नि के बहुत पास न जाने दें, सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
विधि से ज्यादा महत्वपूर्ण है भावना
होलिका दहन 2026 की पूजा विधि शास्त्रों और आधुनिक पंचांगों, दोनों के अनुरूप बहुत सरल है—
शुद्ध मन, सही मुहूर्त, विधिवत पूजन, अग्नि प्रज्वलन, परिक्रमा और प्रसाद।
सबसे ज़्यादा महत्व उस भावना का है, जिसके साथ आप यह संकल्प लेते हैं कि इस वर्ष अपने भीतर की बुराइयों, नकारात्मक सोच और अहंकार को जलाकर, एक नए, सकारात्मक और रंगों से भरे जीवन की ओर कदम बढ़ाएंगे। यही होलिका दहन 2026 का असली आध्यात्मिक संदेश भी है।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। Publicreact.in इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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