सरस्वती स्तोत्रम्, स्तोत्रम् का पाठ अक्सर छात्रों, संगीतकारों, विद्वानों और आध्यात्मिक साधकों द्वारा ज्ञान, रचनात्मकता और वाक्पटुता के लिए देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। स्तोत्रम् प्रतीकवाद और अर्थ से समृद्ध है, जो सरस्वती के दिव्य गुणों और साधक की भक्ति का सार प्रस्तुत करता है।
सबसे प्रसिद्ध सरस्वती स्तोत्रों में से एक का श्रेय ऋषि अगस्त्य को दिया जाता है, और यह देवी के गुणों और भक्त की ज्ञान और कलात्मक अभिव्यक्ति की लालसा को खूबसूरती से दर्शाता है। यहां सरस्वती स्तोत्रम की विस्तृत खोज की गई है, जिसमें इसके महत्व, संरचना और इसके छंदों में निहित गहन अर्थों पर प्रकाश डाला गया है।
जब भी जीवन में स्पष्टता की आवश्यकता होती है, जब मन में प्रश्न अधिक और उत्तर कम लगने लगते हैं, तब श्री सरस्वती स्तोत्रम् एक दिव्य सहारा बनकर सामने आता है। यह स्तोत्र माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त करने का पवित्र माध्यम है, जो ज्ञान, वाणी, स्मरण शक्ति और विवेक की देवी मानी जाती हैं। प्राचीन काल से लेकर आज तक, विद्वान, विद्यार्थी और साधक इस स्तोत्र का पाठ करते आए हैं।
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सरस्वती स्तोत्रम् क्या है?
श्री सरस्वती स्तोत्रम् एक प्राचीन संस्कृत पाठ है जो माता सरस्वती की महिमा का गुणगान करता है। यह स्तोत्र देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, कला और वाणी की अधिष्ठात्री देवी के रूप में वर्णित करता है।
“स्तोत्र” का अर्थ है “स्तुति” या “प्रशंसा।” जब हम श्री सरस्वती स्तोत्रम् का पाठ करते हैं, तो हम माता को उनकी सभी विशेषताओं के साथ सम्मानित करते हैं और उनका आशीर्वाद माँगते हैं।
॥ सरस्वती स्तोत्रम् (Saraswati Stotram Lyrics)॥
॥ इति श्रीसरस्वती स्तोत्रम् संपूर्णं ॥
या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवलाया शुभ्र-वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकराया श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत-शङ्कर-प्रभृतिभिर्देवैःसदा पूजिता
सा मां पातु सरस्वती भगवतीनिःशेषजाड्यापहा॥1॥दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिःस्फटिकमणिमयीमक्षमालां दधाना
हस्तेनैकेन पद्मं सितमपिच शुकं पुस्तकं चापरेण।भासा कुन्देन्दु-शंखस्फटिकमणिनिभाभासमानाऽसमाना
सा मे वाग्देवतेयं निवसतुवदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥2॥आशासु राशी भवदंगवल्लि भासैवदासीकृत-दुग्धसिन्धुम्।
मन्दस्मितैर्निन्दित-शारदेन्दुंवन्देऽरविन्दासन-सुन्दरि त्वाम्॥3॥शारदा शारदाम्बोजवदना वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात्॥4॥सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृ-देवताम्।
देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जनाः॥5॥पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्नः सरस्वती।
प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या॥6॥शुद्धां ब्रह्मविचारसारपरमा-माद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्पाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥7॥वीणाधरे विपुलमंगलदानशीले
भक्तार्तिनाशिनि विरिंचिहरीशवन्द्ये।
कीर्तिप्रदेऽखिलमनोरथदे महार्हेविद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम्॥8॥
श्वेताब्जपूर्ण-विमलासन-संस्थिते हेश्वेताम्बरावृतमनोहरमंजुगात्रे।
उद्यन्मनोज्ञ-सितपंकजमंजुलास्येविद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम्॥9॥
मातस्त्वदीय-पदपंकज-भक्तियुक्ता
ये त्वां भजन्ति निखिलानपरान्विहाय।
ते निर्जरत्वमिह यान्ति कलेवरेणभूवह्नि-वायु-गगनाम्बु-विनिर्मितेन॥10॥
मोहान्धकार-भरिते हृदये मदीये
मातः सदैव कुरु वासमुदारभावे।
स्वीयाखिलावयव-निर्मलसुप्रभाभिः
शीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम्॥11॥ब्रह्मा जगत् सृजति पालयतीन्दिरेशः
शम्भुर्विनाशयति देवि तव प्रभावैः।
न स्यात्कृपा यदि तव प्रकटप्रभावे
न स्युः कथंचिदपि ते निजकार्यदक्षाः॥12॥लक्ष्मिर्मेधा धरा पुष्टिर्गौरी तृष्टिः प्रभा धृतिः।
एताभिः पाहि तनुभिरष्टभिर्मां सरस्वती॥13॥सरसवत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नमः।
वेद-वेदान्त-वेदांग-विद्यास्थानेभ्य एव च॥14॥सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने।
विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तु ते॥15॥यदक्षर-पदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥16॥
सरस्वती स्तोत्रम् का आध्यात्मिक महत्व
श्री सरस्वती स्तोत्रम् केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है। इसमें गहरा आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक महत्व है।
जब आप सरस्वती स्तोत्रम् का पाठ करते हैं, तो आप: अपने अंदर की ज्ञान शक्ति को जागृत करते हैंमाता सरस्वती से एक सीधा संबंध स्थापित करते हैं
- अपने मन को शुद्ध और केंद्रित करते हैं
- ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता का आह्वान करते हैं
पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह स्तोत्र ब्रह्मा द्वारा रचित है। इसलिए इसमें सृष्टि के निर्माता की आध्यात्मिक शक्ति निहित है।
श्री सरस्वती स्तोत्रम् के लाभ
छात्रों के लिए – शैक्षणिक सफलता
श्री सरस्वती स्तोत्रम् विशेषकर छात्र-छात्राओं के लिए बेहद प्रभावी है:
- स्मरण शक्ति में वृद्धि – जो भी पढ़ते हैं, वह लंबे समय तक याद रहता है
- ध्यान केंद्रीकरण – पढ़ाई में पूर्ण एकाग्रता
- परीक्षा में सफलता – बेहतर परिणाम और आत्मविश्वास
- बुद्धिमत्ता का विकास – स्पष्ट सोच और तीव्र निर्णय
कलाकारों के लिए – रचनात्मकता
संगीतकार, चित्रकार, नर्तक और अन्य कलाकारों के लिए:
- रचनात्मक विचार आते हैं
- कलात्मक उत्कृष्टता में वृद्धि
- नई प्रेरणा का अभिव्यक्ति
- वाणी और संचार में सुधार
सरस्वती स्तोत्रम् को गाने से:
- वाणी की शक्ति बढ़ती है
- संचार कौशल में सुधार होता है
- वाक् दोष दूर होते हैं
सार्वजनिक बोलने में आत्मविश्वास आता है मानसिक शांति और स्पष्टता नियमित पाठ से:
- मानसिक शांति प्राप्त होती है
- चिंता और तनाव कम होता है
- जीवन में स्पष्टता आती है
- सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है
सरस्वती स्तोत्रम् का पाठ कैसे करें?
- सही समय और विधि:समय ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 1-2 घंटे पहले)
- स्थान शांत और पवित्र जगह
- वस्त्र सफेद या पीले रंग के कपड़े
- भाव हृदय से, समर्पण के साथ

बसंत पंचमी पर श्री सरस्वती स्तोत्रम्
बसंत पंचमी (23 जनवरी) को श्री सरस्वती स्तोत्रम् का विशेष महत्व है। इस दिन स्कूल, कॉलेज और मंदिरों में सामूहिक रूप से इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है।
श्री सरस्वती स्तोत्रम् केवल एक प्राचीन ग्रंथ नहीं है – यह एक शक्तिशाली साधन है जो आपके जीवन में ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता ला सकता है।
नियमित पाठ से आप शैक्षणिक सफलता, मानसिक शांति, और आध्यात्मिक विकास प्राप्त कर सकते हैं।
आज ही श्री सरस्वती स्तोत्रम् का पाठ शुरू करें और माता सरस्वती का आशीर्वाद पाएं।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। Publicreact.in इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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