हिंदू धर्म में माँ सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, संगीत, कला, विज्ञान और वाणी की देवी माना जाता है। उन्हें वीणा, पुस्तक और माला के साथ सफेद वस्त्रों में, हंस या कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। वे अज्ञानता के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश देने वाली देवी हैं। विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, गायक, वादक, चित्रकार और हर तरह के क्रिएटिव लोग माँ सरस्वती जी और मंत्रों के माध्यम से उनसे कृपा की प्रार्थना करते हैं। इसी वजह से वसंत पंचमी और परीक्षा के समय लोग अक्सर माता सरस्वती जी की आरती खोजते हैं, ताकि सही विधि से आराधना कर सकें।
सरस्वती आरती (Saraswati Aarti Lyrics)
जय सरस्वती माता,मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥चन्द्रवदनि पद्मासिनि,द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी,अतुल तेजधारी॥
जय सरस्वती माता॥बाएं कर में वीणा,दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे,गल मोतियन माला॥
जय सरस्वती माता॥देवी शरण जो आए,उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी,रावण संहार किया॥
जय सरस्वती माता॥विद्या ज्ञान प्रदायिनि,ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का,जग से नाश करो॥
जय सरस्वती माता॥धूप दीप फल मेवा,माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता,जग निस्तार करो॥
जय सरस्वती माता॥माँ सरस्वती जी की आरती,जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारीज्ञान भक्ति पावे॥
जय सरस्वती माता॥जय सरस्वती माता,जय जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥

सरस्वती आरती का महत्व (Benefits of Saraswati Aarti)
माता सरस्वती जी की आरती केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि ध्यान और एकाग्रता की एक सुंदर साधना है। पूजा के बाद आरती करने से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सरस्वती आरती के कुछ प्रमुख महत्व इस प्रकार माने जाते हैं:
- एकाग्रता में वृद्धि: नियमित रूप से सरस्वती आरती के साथ आरती करने से मन पढ़ाई और साधना में स्थिर होने लगता है।
- वाणी और अभिव्यक्ति में सुधार: माँ सरस्वती वाणी की देवी हैं, इसलिए उनकी आरती और स्तुति व्यक्ति की बोलने की क्षमता, प्रस्तुति कौशल और आत्मविश्वास को बल देती है।
- नकारात्मकता का नाश: आरती के समय दीपक, घी, धूप और घंटी की ध्वनि वातावरण में पवित्रता और सकारात्मकता लाती है।
इसीलिए कई परिवारों में रोज़ शाम को या कम से कम वसंत पंचमी के दिन ज़रूर सरस्वती आरती गाई और की जाती है।
सरस्वती आरती कैसे करें? (सरल विधि)
अगर आप पहली बार सरस्वती पूजा कर रहे हैं तो आरती की यह आसान विधि उपयोगी रहेगी:
- स्वच्छ स्थान पर सरस्वती माँ की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पीले या सफेद फूल, अक्षत (चावल), जल, दीपक, धूप और प्रसाद (तिल–गुड़, मिश्री, बूंदी, या फल) तैयार रखें।
- पहले संक्षिप्त पूजा करें – दीपक जलाएँ, जल अर्पित करें, पुष्प चढ़ाएँ और मन ही मन या आवाज़ से सरस्वती मंत्र बोलें।
- पूजा के बाद माँ सरस्वती की आरती गाएँ।
- आरती के बाद परिवार या भक्तों में प्रसाद बाँटें।
ध्यान रखें, पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आपका भाव (भक्ति और निष्ठा) है, न कि केवल लंबी प्रक्रिया।
माता सरस्वती जी की आरती से लाभ (Benefits of Saraswati Aarti)
आधुनिक समय में भी सरस्वती जी की आरती को सिर्फ धार्मिक रिवाज़ की तरह न देखकर, एक माइंडफुल और पॉज़िटिव रिचुअल की तरह अपनाया जा सकता है।
कुछ मुख्य लाभ जो लोग अनुभव करते हैं:
- Focus और Memory: परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को कई बार लगता है कि पढ़ते–पढ़ते मन भटकता है। रोज़ कुछ मिनट शांत बैठकर आरती गाने या सुनने से मन केंद्रित होता है, और स्मरण शक्ति बेहतर महसूस होती है।
- रचनात्मकता में वृद्धि: सिंगर्स, म्यूज़िशियन, डांसर, पेंटर या कंटेंट क्रिएटर, जो अपने काम को एक साधना मानते हैं, उनके लिए माँ सरस्वती की आरती अपने टैलेंट को सम्मान देने जैसा है।
- तनाव कम होना: आरती की धुन, दीपक की लौ और भक्ति भरे शब्द मिलकर एक मेडिटेटिव माहौल बनाते हैं। इससे तनाव कम और मन हल्का महसूस होता है।
यह आरती न केवल पूजा के समय बल्कि शैक्षिक अवसरों पर भी गाई जाती है, जिससे शिक्षा के प्रति समर्पण और उत्साह का भाव जागृत होता है। चाहे आप विद्यार्थी हों, प्रोफेशनल हों या क्रिएटिव फील्ड में, माता सरस्वती जी की आरती आपके दिन की एक सुंदर शुरुआत या शांत अंत बन सकती है। यह हमें याद दिलाती है कि असली शक्ति केवल डिग्री या मार्क्स नहीं, बल्कि सही ज्ञान, स्पष्ट सोच और सच्ची वाणी में छिपी होती है।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। Publicreact.in इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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