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Mahashivratri 2026 Date – महाशिवरात्रि 2026: महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम और शुभकामनाएँ

Mahashivratri Date and Time 2026. महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? जानिए भगवान शिव का आध्यात्मिक महत्व, महाशिवरात्रि 2026 की सही तिथि-पूजा मुहूर्त, व्रत नियम, कथाएँ और भक्तिमय शुभकामनाएँ।

महा शिवरात्रि हिन्दू धर्म में एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान शिव की आराधना और पूजा के लिए समर्पित है। यह पर्व फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर फरवरी या मार्च में आती है। महाशिवरात्रि को ‘शिव की रात’ के रूप में भी जाना जाता है, और इसे भक्ति, उपवास, जागरण और ध्यान के माध्यम से मनाया जाता है।

भगवान शिव का रहस्य और महिमा

महा शिवरात्रि एक ऐसा पर्व है जो हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र अवसरों में से एक है। यह दिन सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण है जो लाखों भारतीयों के दिलों को भगवान शिव की ओर आकर्षित करता है। महाशिवरात्रि का अर्थ है शिव की महान रात – एक ऐसी रात जब संपूर्ण ब्रह्मांड शिव की शक्ति और करुणा से भर जाता है।

हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव का जन्म हुआ था, और इसी रात को शिव ब्रह्मांड के निर्माता, पालक और संहारक के रूप में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से, महाशिवरात्रि का अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर, और मृत्यु से अमरता की ओर यात्रा।

महाशिवरात्रि 2026 दिन और समय ( Mahashivratri 2026 Date and Time in Hindi)

महाशिवरात्रि, रविवार, 15 फरवरी, 2026

निशिता काल पूजा का समय – 16 फरवरी, रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक

अवधि – 00 घंटे 51 मिनट

16 फरवरी को शिवरात्रि पारणा का समय – सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक

  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06:11 बजे से रात 09:23 बजे तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – रात्रि 09:23 बजे से रात्रि 12:35 बजे तक, 16 फरवरी
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:35 पूर्वाह्न से 03:47 पूर्वाह्न, 16 फरवरी
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:47 पूर्वाह्न से 06:59 पूर्वाह्न, 16 फरवरी
  • चतुर्दशी तिथि आरंभ – 15 फरवरी 2026 को शाम 05:04 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त – 16 फरवरी, 2026 को शाम 05:34 बजे
महाशिवरात्रि दिन और पूजा मुहूर्त 2026

रात्रि के चार प्रहर: चेतना के ऊर्ध्वगमन का विज्ञान (The Four Prahars)

महाशिवरात्रि की महिमा ‘निशिता काल’ और रात्रि जागरण (Vigil) में निहित है। अध्यात्म विज्ञान के अनुसार, मध्यरात्रि का यह समय वह संधि काल है जब आयामों के बीच का पर्दा अत्यंत सूक्ष्म हो जाता है। 15-16 फरवरी 2026 की रात्रि के चारों प्रहरों का समय शास्त्र सम्मत गणना के अनुसार इस प्रकार है:

  • प्रथम प्रहर पूजा: सायं 06:11 PM से रात्रि 09:23 PM (15 फरवरी)
  • द्वितीय प्रहर पूजा: रात्रि 09:23 PM से मध्यरात्रि 12:35 AM (16 फरवरी)
  • तृतीय प्रहर पूजा: मध्यरात्रि 12:35 AM से प्रातः 03:47 AM (16 फरवरी)
  • चतुर्थ प्रहर पूजा: प्रातः 03:47 AM से प्रातः 06:59 AM (16 फरवरी)

विशेष रूप से, निशिता काल (12:09 AM से 01:01 AM) का वह दिव्य क्षण है जब भगवान शिव पृथ्वी पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। रात्रि भर जागकर की जाने वाली यह साधना साधक के अहंकार के विसर्जन और आंतरिक प्रकाश के प्रकटीकरण का प्रतीक है।

महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व और कथाएं

महाशिवरात्रि से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पौराणिक कथाएं हैं जो इस पर्व को विशेष बनाती हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, इसी रात को भगवान शिव और देवी माँ पार्वती का विवाह हुआ था। इस विवाह से ब्रह्मांड में शक्ति और शांति का संतुलन स्थापित हुआ। शिव और पार्वती का यह मिलन सिर्फ एक दिव्य विवाह नहीं था, बल्कि शक्ति (शक्तिमान) और शक्ति (ऊर्जा) का एक परफेक्ट संतुलन था।

एक अन्य कथा के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय हलाहल विष को अपने गले में धारण किया था। इस विष को पीकर शिव ने पूरी दुनिया को बचाया था। यह घटना शिव की त्याग और बलिदान की भावना को दर्शाती है। शिव अपने प्रिय भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी कष्ट को सहन करने को तैयार हैं।

एक तीसरी कथा में कहा जाता है कि महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव ने अपना विष्णु रूप धारण किया और दुष्टों का संहार किया। इसी रात को शिव ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ को ध्वस्त किया और अपनी पत्नी सती की मृत्यु का बदला लिया। ये सभी कथाएं महाशिवरात्रि को एक महत्वपूर्ण तिथि बनाती हैं जहां भगवान शिव अपनी पूरी शक्ति और करुणा का प्रदर्शन करते हैं।

शिवलिंग पूजा

शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है। शिव का अर्थ है – कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है सृजन। सृजनहार  के रूप में लिंग की पूजा होती है। संस्कृत भाषा में लिंग का अर्थ है प्रतीक, भगवान शिव अनंत काल के प्रतीक हैं। मान्यताओं के अनुसार, लिंग एक विशाल लौकिक अंडाशय है, जिसका अर्थ है ब्रह्माण्ड, इसे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है।

महाशिवरात्रि पर शिव की पूजा और आध्यात्मिक महत्व

महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस रात भक्त रातभर जागते हैं, ध्यान करते हैं, और शिव मंत्रों का जाप करते हैं। शिव का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है “ॐ नमः शिवाय” – एक ऐसा मंत्र जो हजारों वर्षों से हिंदुओं के दिलों में बसा हुआ है।

महाशिवरात्रि की रात को शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का अभिषेक किया जाता है। इसे “पंचामृत” कहा जाता है। पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्त को आध्यात्मिक शुद्धता और मोक्ष की ओर ले जाया जाता है। शिवलिंग के चारों ओर परिक्रमा करना, शिव को फूल चढ़ाना, और उनके नाम का कीर्तन करना – ये सभी कार्य महाशिवरात्रि की रात को विशेष पवित्रता प्राप्त करते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से, महाशिवरात्रि मनुष्य के अंदर की नकारात्मक शक्तियों को खत्म करने और सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने का समय है। शिव को “महायोगी” (महान योगी) कहा जाता है, और उनकी ध्यान शक्ति अतुलनीय है। महाशिवरात्रि की रात को ध्यान करने से मन को शांति मिलती है, विचारों में स्पष्टता आती है, और आत्मा को मुक्ति की ओर ले जाने वाली शक्ति मिलती है।

महाशिवरात्रि के परंपरागत रीति-रिवाज और उत्सव

महाशिवरात्रि को मनाने के तरीके देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग हैं, लेकिन मूल भावना सभी जगह एक ही है – भगवान शिव को समर्पण। इस दिन लोग व्रत रखते हैं, जिसका अर्थ है कि वे अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करते हैं और शिव के चिंतन में मन लगाते हैं।

कई लोग महाशिवरात्रि की रात भर जागते हैं और भजन गाते हैं। शिव मंदिरों में लोगों की भीड़ होती है, और भक्त शिवलिंग को चढ़ावा देते हैं। कुछ लोग महाशिवरात्रि के दिन माता के दरबार में जाते हैं, क्योंकि यह दिन माता की शक्ति को भी समर्पित है। हरिद्वार, वाराणसी, और अयोध्या जैसे पवित्र शहरों में महाशिवरात्रि पर हजारों हजार भक्त इकट्ठा होते हैं।

महाशिवरात्रि की सुबह, लोग गंगा में स्नान करते हैं और भगवान शिव को फूल, फल और प्रसाद चढ़ाते हैं। घरों में प्रसाद बनाया जाता है, जिसे परिवार के सदस्यों के बीच बांटा जाता है। महाशिवरात्रि सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज को एकजुट करने का एक माध्यम भी है।

महाशिवरात्रि और आधुनिक जीवन में आध्यात्मिकता

आजकल की दौड़भरी जिंदगी में, लोग अक्सर अपने आध्यात्मिक पक्ष को भूल जाते हैं। महाशिवरात्रि एक ऐसा पर्व है जो हमें वापस अपनी जड़ों की ओर ले जाता है। इस दिन हम न केवल भगवान शिव को पूजते हैं, बल्कि अपने आंतरिक शिव को भी जागृत करते हैं।

शिव को “अर्धनारीश्वर” (आधा नर, आधा नारी) के रूप में भी दर्शाया जाता है, जो यह दर्शाता है कि शिव में सभी शक्तियां हैं – पुरुषत्व और स्त्रीत्व, क्रूरता और करुणा, ध्वंस और सृष्टि। आधुनिक दुनिया में जहां लोग अपनी पहचान खोते जा रहे हैं, वहां भगवान शिव का यह रूप हमें संतुलित जीवन जीने की सीख देता है।

महाशिवरात्रि पर ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है, तनाव कम होता है, और जीवन में एक दिशा मिलती है। शिव की शिक्षाओं के अनुसार, सच्ची खुशी न तो बाहरी चीजों में है और न ही किसी व्यक्ति के अनुमोदन में – सच्ची खुशी आत्मा के भीतर है। महाशिवरात्रि हमें इसी सत्य को समझने का अवसर देती है।

महाशिवरात्रि व्रत के नियम और लाभ

महाशिवरात्रि पर व्रत रखना एक परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। लेकिन व्रत का मतलब सिर्फ भोजन न करना नहीं है। असली व्रत मन को शुद्ध करना, विचारों को पवित्र करना, और शिव के प्रति अपने समर्पण को दिखाना है।

महाशिवरात्रि पर व्रत रखने वाले लोग आमतौर पर फल, दूध, दही, और मेवे खाते हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलों पर ही रहते हैं, जबकि कुछ एक ही बार भोजन करते हैं। व्रत के दौरान प्याज और लहसुन नहीं खाते, क्योंकि ये तामसिक माने जाते हैं और मन को शांत रखने में बाधा डालते हैं।

व्रत रखने के लाभ केवल आध्यात्मिक नहीं हैं, बल्कि शारीरिक भी हैं। व्रत से पाचन तंत्र को आराम मिलता है, शरीर की आंतरिक सफाई होती है, और मन में सकारात्मकता आती है। महाशिवरात्रि का व्रत करने से शिव का आशीर्वाद मिलता है, मन में शांति आती है, और जीवन में समृद्धि होती है।

महाशिवरात्रि का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है; यह भारतीय संस्कृति और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन समाज के सभी वर्ग के लोग एकजुट होते हैं – अमीर, गरीब, ब्राह्मण, दलित, सभी मिलकर शिव को पूजते हैं।

महाशिवरात्रि पर मंदिरों में प्रसाद बंटाया जाता है, जहां हजारों लोग भोजन पाते हैं। यह परंपरा समाज में एक भावना पैदा करती है – कि हम सभी एक हैं, हम सभी एक ही ईश्वर के बच्चे हैं। महाशिवरात्रि पर संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति की समृद्धता को दर्शाता है।

इसके अलावा, महाशिवरात्रि के दिन लोग एक-दूसरे को क्षमा करते हैं, रिश्तों को मजबूत करते हैं, और नई शुरुआत करते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी समस्याएं हों, हम सभी एक आध्यात्मिक शक्ति से जुड़े हैं जो हमें प्रकाश दिखाती है।

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने से अशुभ ग्रह शांत होते हैं। इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से कालसर्प दोष दूर होता है, इसके साथ चंद्रमा की अशुभता को भी दूर करने में मदद मिलती है। चंद्रमा के अशुभ होने से व्यक्ति को मानसिक तनाव होता है जिससे कार्य क्षमता प्रभावित होने लगती है। जिस कारण धनहानि की भी स्थिति बनने लगती है। वहीं दांपत्य जीवन से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती

महाशिवरात्रि 2026 की शुभकामनाएं

महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं और आशीर्वाद संदेश
  • भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद आपको धार्मिकता और मुक्ति के मार्ग पर ले जाए। महा शिवरात्रि की शुभकामनाएँ!
  • भगवान शिव के शुभ आशीर्वाद से भरपूर महा शिवरात्रि की आपको शुभकामनाएं। आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण हो।
  • महा शिवरात्रि पर, क्या आप शिव के दिव्य प्रेम और आशीर्वाद से प्रभावित हो सकते हैं। ओम नमः शिवाय!
  • महाशिवरात्रि मनाएं और समृद्धि और सफलता के जीवन के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लें।

Read more here –> महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ

शिव जी का विशेष मंत्र

ऊँ नम: शिवाय।।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

महामृत्युंजय गायत्री मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्‌।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्‌ ॐ स्वः भुवः ॐ सः जूं हौं ॐ ॥

शिव आरती

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा.

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा. ॐ जय शिव…

एकानन चतुरानन पंचानन राजे.

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे. ॐ जय शिव…

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे. ॐ जय शिव…

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी.

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी. ॐ जय शिव…

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे.

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे. ॐ जय शिव…

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता.

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता. ॐ जय शिव…

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका.

प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका. ॐ जय शिव…

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी.

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी. ॐ जय शिव…

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे.

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे. ॐ जय शिव..

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: महाशिवरात्रि कब मनाई जाती है, और इसे इसी नाम से क्यों कहा जाता है?

उत्तर: महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन मास (फरवरी-मार्च) की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (14वीं तिथि) को मनाई जाती है। 2026 में महाशिवरात्रि 28 फरवरी को है। “महाशिवरात्रि” का अर्थ है “शिव की महान रात”। “महा” का मतलब है महान, “शिव” हिंदुओं के देवता हैं, और “रात्रि” का अर्थ है रात। इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है क्योंकि इसी रात को भगवान शिव का जन्म हुआ था और इसी रात को वह अपनी दिव्य शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं।

प्रश्न 2: महाशिवरात्रि पर व्रत रखने के क्या नियम हैं?

उत्तर: महाशिवरात्रि पर व्रत रखने के कुछ सामान्य नियम हैं:

  • (1) व्रत के दौरान अनाज, नमक, और मसालेदार भोजन नहीं खाते।
  • (2) फल, दूध, दही, मेवे, और आलू का सेवन किया जा सकता है।
  • (3) कुछ लोग पूरे दिन फलों पर ही रहते हैं।
  • (4) व्रत के दौरान प्याज और लहसुन नहीं खाते।
  • (5) रात भर जागना और शिव का ध्यान करना महत्वपूर्ण है।
  • (6) अगली सुबह गंगा में स्नान करके व्रत खोला जाता है।
  • हालांकि, व्रत के नियम कई कारणों से भिन्न हो सकते हैं, लेकिन मुख्य उद्देश्य भगवान शिव को समर्पित होना है।

प्रश्न 3: महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में क्या अंतर है?

उत्तर: हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि कहा जाता है, लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसे महान शिवरात्रि कहा जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव का जन्म हुआ था और इसी दिन उनकी शक्ति सबसे अधिक होती है। महाशिवरात्रि को साल की सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र रात माना जाता है, जबकि अन्य शिवरातियां भी महत्वपूर्ण हैं लेकिन महाशिवरात्रि जितनी नहीं।

प्रश्न 4: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक कैसे किया जाता है?

उत्तर: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक एक पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। शिवलिंग को सबसे पहले गंगाजल से धोया जाता है, फिर दूध, दही, घी, शहद, और गुड़ का अभिषेक किया जाता है – इसे पंचामृत कहा जाता है। इसके बाद फूल, बेलपत्र, और चंदन का लेप शिवलिंग पर लगाया जाता है। आरती की जाती है, और भक्त शिव का नाम लेते हैं। इस प्रक्रिया का अर्थ है शिव के शरीर को शुद्ध करना और उन्हें सम्मानित करना। पंचामृत का अभिषेक शिव की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।

प्रश्न 5: महाशिवरात्रि पर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का क्या महत्व है?

उत्तर: “ॐ नमः शिवाय” भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है और इसका अर्थ है “मैं शिव को प्रणाम करता हूं”। यह एक महान मंत्र है जो हजारों वर्षों से हिंदू धर्म में पूजा जाता है। महाशिवरात्रि पर इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है, आत्मा को प्रकाश मिलता है, और शिव का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि इस मंत्र को 108 बार दोहराने से सभी पापों की क्षमा हो जाती है। यह मंत्र न केवल एक आध्यात्मिक साधन है, बल्कि शिव से सीधा संचार का माध्यम भी है। जब भक्त इस मंत्र का जाप करते हैं, तो वे शिव के साथ एक गहरा संबंध महसूस करते हैं।

महाशिवरात्रि का संदेश और आमंत्रण

महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है – यह एक आध्यात्मिक जागरण है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम सभी एक बड़ी शक्ति से जुड़े हैं, जो हमें प्रकाश, शांति, और ज्ञान देती है। भगवान शिव हमारे आंतरिक शक्ति के प्रतीक हैं, और महाशिवरात्रि वह दिन है जब हम उस शक्ति को अनुभव कर सकते हैं।

इस महाशिवरात्रि पर, हम आपको आमंत्रित करते हैं कि आप व्रत रखें, प्रार्थना करें, और शिव के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा शुरू करें। अपने मन को शांत करें, अपने विचारों को पवित्र करें, और अपने आत्मा को शिव के करीब ले जाएं। महाशिवरात्रि पर, हर दिल में शिव की शक्ति जागती है, और यह शक्ति हमें बेहतर इंसान बनाने में मदद करती है।

आपके विचार और अनुभव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। कृपया हमें बताएं – आप महाशिवरात्रि को कैसे मनाते हैं? शिव आपके जीवन में क्या बदलाव ला चुके हैं? अपनी कहानी कमेंट बॉक्स में साझा करें और इस महान पर्व को अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें। जब और लोग महाशिवरात्रि का सच्चा अर्थ समझेंगे, तो समाज में सकारात्मकता फैलेगी।

ॐ नमः शिवाय! महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!

(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। Publicreact.in इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

नोट: हमारे द्वारा उपरोक्त लेख में अगर आपको कोई त्रुटि दिखे या फिर लेख को बेहतर बनाने के आपके कुछ सुझाव है तो कृपया हमें कमेंट या फिर ईमेल के द्वारा बता सकते है हम आपके सुझावों को प्राथिमिकता के साथ उसे अपनाएंगे धन्यवाद !

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